Uric Acid : कितना यूरिक एसिड होना चाहिए महिलाओं में कंट्रोल करने के लिए देखें सिंपल चार्ट.

Causes of uric acid in females: महिलाओं में यूरिक एसिड बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से एक है फास्टिंग। आइए जानते हैं-

Uric Acid Level Chart : यूरिक एसिड एक शरीर में बनने वाला जहर है जो हर किसी के शरीर में उत्पन्न होता है। यूरिक एसिड का बढ़ना कोई समस्या नहीं है, लेकिन इससे छुटकारा न मिलना शरीर को बीमार कर देता है। डाइट में प्यूरीन युक्त फूड्स पदार्थ जैसे रेड मीट, सीफूड, कुछ मछली, पोल्ट्री उत्पाद और मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है। यूरिक एसिड बढ़ने के बाद इसके लक्षण शरीर में दिखने लगते हैं। यूरिक एसिड के लक्षणों में जोड़ों में दर्द और सूजन, पैर की उंगलियों में सूजन, जोड़ों में गांठ और उंगलियों में दर्द शामिल हैं।

ब्लड में कितना होना चाहिए यूरिक एसिड ? | Uric acid Level in Blood
मेडिकल न्यूज टुडे के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं में यूरिक एसिड का स्तर अलग-अलग होता है। महिलाओं में यूरिक एसिड का स्तर 2.4 से 6.0 mg/dL की सीमा में सामान्य माना जाता है। अगर महिलाओं में यूरिक एसिड 6.0 mg/dL से कम है तो यह खतरनाक नहीं है। हर इंसान में कम या ज्यादा यूरिक एसिड बनता है, जिसे किडनी फिल्टर करके शरीर से बाहर निकाल देती है। खतरा तब बढ़ जाता है जब यह जहर शरीर में जमा होने लगता है।

यूरिक एसिड का स्तर कितना होना चाहिए? उम्र के हिसाब से चार्ट देखें

वयस्क पुरुष: 4.0-8.5 mg/dL या 0.24-0.51 mmol/L

वयस्क महिला: 2.7-7.3 mg/dL या 0.16-0.43 mmol/L

बुजुर्ग: मामूली वृद्धि हो सकती है।

बच्चा: 2.5-5.5 mg/dL या 0.12-0.32 mmol/L

नवजात: 2.0-6.2 mg/dL

महिलाओं में यूरिक एसिड का स्तर कितना होना चाहिए? | Uric acid level in women
महिलाओं में सामान्य स्तर 1.5 से 6.0 mg/dL है। महिलाओं में जब यूरिक एसिड का स्तर 9.5 मिलीग्राम/डीएल तक पहुंच जाता है, तो यह शरीर को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। यूरिक एसिड के इन बढ़े हुए स्तरों से गुर्दे की विफलता, किडनी और ब्लड प्रेशर और मधुमेह हो सकता है।

यूरिक एसिड ऐसे करें कंट्रोल | Uric Acid Control Tips

फल और सब्जियों का सेवन करें।

डाइट में प्यूरीन युक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करें।

पानी ज्यादा पिएं।

रेड मीट, सीफूड से परहेज करें।

सोया, पनीर, दाल जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करें।

खाने में लो फैट फूड का इस्तेमाल करें। उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ समस्या को बढ़ा सकते हैं।

रोजाना आधा घंटा टहलें या व्यायाम करें।