बड़ा ऐलान! Delhi AIIMS में बंद होगा कैश भुगतान, ऑनलाइन होंगे सभी पेमेंट.

बीमार होने पर एम्स में इलाज कराना है तो कैशलेस भुगतान की आदत डाल लें। क्योंकि बहुत जल्द ही एम्स में सिर्फ कैशलेस ही बिल भुगतान हो पाएगा। इसके लिए एम्स प्रशासन मरीजों और उनके तीमारदारों को दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर ‘एम्स स्मार्ट कार्ड’ जारी करेगा। इसका मकसद एम्स में शुल्क भुगतान की सुविधा को सरल बनाना और मरीजों को लाइन में लगने से छुटकारा दिलाना है।

स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआइ) के साथ मिलकर यह एम्स स्मार्ट कार्ड जारी किया जाएगा। इस स्मार्ट कार्ड के जरिए इलाज के शुल्क के अलावा मरीज कैफेटेरिया में खानपान का बिल भुगतान भी कर सकेंगे। बृहस्पतिवार को एम्स प्रशासन द्वारा जारी आदेश के मुताबिक नए साल में एक अप्रैल से एम्स स्मार्ट कार्ड से भुगतान की सुविधा शुरू होगी।

एम्स की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 13 हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। सैकड़ों मरीज वार्ड में भर्ती लिए जाते हैं। एम्स में 300 रुपये तक की जांच मुफ्त है। लेकिन इससे अधिक शुल्क वाले विभिन्न जांच, इंप्लांट, प्राइवेट वार्ड इत्यादि के लिए शुल्क भुगतान करना पड़ता है। इस कार्य के लिए मरीजों को कई बार लाइन में लगना पड़ता है।

21 नवंबर से होगी स्कैन एंड शेयर क्यूआर कोड की शुरुआत :

यह परियोजना 21 नवंबर से नयी राजकुमारी अमृत कौर ओपीडी में शुरू की जाएगी और एक जनवरी से एम्स नयी दिल्ली के सभी ओपीडी में मिशन मोड में शुरू की जाएगी. कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है कि एबीएचए आईडी ओटीपी का उपयोग करते हुए रजिस्ट्रेशन के समय अकसर देरी होती है और ओटीपी को फिर से भेजने का अधिकतम प्रयास भी तीन बार तक सीमित है.

स्कैन और शेयर क्यूआर कोड से रजिस्ट्रेशन में लगेंगे कम समय :

इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के स्कैन और शेयर क्यूआर कोड समाधान ने रजिस्ट्रेशन में लगने वाले समय को कम करने में आशाजनक परिणाम दिखाए हैं और अस्पताल पहुंचने पर मरीज की यात्रा को सुव्यवस्थित करने में भी मदद की है. इसके अलावा, उक्त समाधान बायोमेट्रिक है और एबीएचए आईडी विवरण साझा करने की अनुमति देने के लिए ‘फेस-ऑथेंटिकेशन’ सक्षम है.

जानिए एम्स के निदेशक ने क्या कहा?

एम्स के निदेशक डॉ एम श्रीनिवास द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है, “तदनुसार, एम्स में नए और अनुवर्ती मरीजों के ओपीडी रजिस्ट्रेशन के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एकाउंट (एबीएचए) आईडी के उपयोग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है.” इसमें कहा गया है कि एबीएचए आईडी के उपयोग को और बढ़ाने के लिए, स्वास्थ्य पेशेवरों के साथ रोगियों के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड के क्यूआर कोड आधारित साझाकरण को भी ‘व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड’ (पीएचआर) ऐप्लिकेशन के उपयोग से सक्षम किया जाएगा.